मैं बर्बाद-ऐ-गुलिस्तां का सूखा झाड़ हूँ...
कल तक तो मई आबाद था, पर अब बर्बाद हूँ....
तोता-मैना मिला करते थे मेरी डाल पर...
खिल जाता था मेरा चेहरा मोर की आवाज पर...
बारिश की बूँदें मुझे छेड़-छेड़ कर जाती थीं...
खूबसूरत कलियाँ मुझ पर भी खिल आती थीं...
लेकिन फिर चला आया खिज़ा का मौसम...
हो गईं इक दिन आँखें मेरी भी नम...
चारों तरफ नज़र आ रहा था पतझड़...
लग रहा था आने वाले दिनों से मुझे डर...
मेरे अरमान बिखर गए पत्तों की तरह...
पंछी भी उड़ गए बेगानों की तरह...
पहले मै लेह-लद्दाख था, अब तो बग़दाद हूँ...
मै बर्बाद-ऐ-गुलिस्तां का सूखा झाड़ हूँ...
एक बार फिर एक दिन सावन का वो कल आएगा...
उस पल के लिए मैं बेकरार हूँ...
पहले मैं आबाद था, अब बर्बाद हूँ...
मैं बर्बाद-ऐ-गुलिस्तां का सूखा झाड़ हूँ...
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Thursday, October 22, 2009
Tuesday, October 20, 2009
वो सवाल...
कई लोगों ने आकर कई बार हमसे पूछा...
कि कितनी चाहत है तुम्हारी उनके लिए?
लोग कहते है कि वो अपने हमदम से बहुत मीठा प्यार करते है...
हम तो बस इतना मीठा करते है कि मधुमेह न हो जाए...
वर्ना मधुमेह कई बीमारियाँ पैदा करता है...
लोग कहते है कि वो उनके लिए मर-मिट सकते है...
हम यार बस मर नहीं सकते क्योकि हम जिंदगी का ये सफ़र उनके साथ तय करना चाहते है...
लोग कहते है कि वो सिर्फ उनके है...
हम कहते है वो किसी के भी हो, बस जहाँ हो खुश हो, मस्त हो...
आखिर में पूछा गया कि वो तो है नहीं, फिर कब तक करोगे उनका इंतज़ार...???
मैंने कहा...
हर पल, हर वक़्त, मरते दम तक, और
उसके बाद भी...!!!
- देवास दीक्षित
कि कितनी चाहत है तुम्हारी उनके लिए?
लोग कहते है कि वो अपने हमदम से बहुत मीठा प्यार करते है...
हम तो बस इतना मीठा करते है कि मधुमेह न हो जाए...
वर्ना मधुमेह कई बीमारियाँ पैदा करता है...
लोग कहते है कि वो उनके लिए मर-मिट सकते है...
हम यार बस मर नहीं सकते क्योकि हम जिंदगी का ये सफ़र उनके साथ तय करना चाहते है...
लोग कहते है कि वो सिर्फ उनके है...
हम कहते है वो किसी के भी हो, बस जहाँ हो खुश हो, मस्त हो...
आखिर में पूछा गया कि वो तो है नहीं, फिर कब तक करोगे उनका इंतज़ार...???
मैंने कहा...
हर पल, हर वक़्त, मरते दम तक, और
उसके बाद भी...!!!
- देवास दीक्षित
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