Sunday, October 24, 2010

जीत को तरस गए कंगारू




शायद किसी ने सच ही कहा है- 'समय बड़ा बलवान होता है'. समय कभी भी एक सा नही रहता. यह बात वर्तमान परिपेक्ष्य में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में एकदम सत्य साबित हो रही है. एक वक़्त था जब ग्लेन मैकग्रा, शेन वार्न और स्टीव वॉ सरीखे धुरंधरों वाली ऑस्ट्रलियाई क्रिकेट टीम की तूती अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में बोलती थी. इस टीम के साथ मैच होने पर विपक्षी टीम की हार लगभग तय मानी जाती थी. वक़्त बदला, टीमें बदली और शायद इतिहास के पन्नो में कभी 'अजेय' मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम अब वैसी नही रही. पिछले कुछ वर्षों में ऑस्ट्रलियाई क्रिकेट टीम का वर्चस्व खत्म हो चुका है.
पिछले माह संपन्न हुई टेस्ट व वनडे सीरीज़ के परिणाम तो कुछ इसी ओर इशारा करते हैं. टेस्ट व वनडे, दोनों ही सीरीजों में ऑस्ट्रेलिया को हार का मुँह देखना पड़ा. वहीँ तेज़ी से निखर रही सीनियर खिलाड़ियों के अनुभव व युवाओं के जोश के मेलजोल वाली भारतीय क्रिकेट टीम ने एक बार फिर दिखा दिया कि क्यों उसे विश्व की सबसे मज़बूत टीमों में से एक कहा जाता है.
तो कैसा रहा ऑस्ट्रेलिया टीम का भारत दौरा, आइये देखते हैं-

पहला टेस्ट: 1 से 5 अक्टूबर, पी.सी.ए. स्टेडियम, मोहाली. भारतीय पिचों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाने वाली मोहाली की तेज़ पिच पर ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी करते हुए ओपनर शेन वाटसन के शानदार 128 रनों की बदौलत 428 रनों का स्कोर खड़ा किया. ज़हीर खान ने धारदार गेंदबाजी करते हुए 93 रन देकर 5 व हरभजन सिंह ने 114 रन देकर 3 विकेट चटकाए. ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी के जवाब में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के 98 व सुरश रैना के 86 रनों की बदौलत भारत ने 405 रन बनाए. ऑस्ट्रेलिया के लिए पहली पारी में मिशेल जॉनसन ने मात्र 64 रन देकर 5 विकेट लिए.
पहली पारी में 23 रन की मामूली बढ़त ले ऑस्ट्रलियाई टीम के ओपनर शेन वाटसन व साइमन कैटिच ने टीम को ठोस शुरुआत दी. लेकिन बाकी की ऑस्ट्रेलियाई टीम ताश के पत्तों की तरह 192 रनों पर बिखर गयी. 215 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही. जिस समय मात्र 122 रनों के स्कोर पर सचिन, गंभीर, सहवाग, द्रविड़ और धोनी जैसे दिग्गज पवैलियन लौट चुके थे, तब हमेशा से कंगारुओं की आँख का काँटा रहे वी.वी.एस. लक्ष्मण ने मोर्चा सँभालते हुए 73 रनों की नाबाद पारी खेली. 'वैरी वैरी स्पेशल लक्ष्मण' का ईशांत शर्मा (31 रन) ने बखूबी साथ निभाया. बेहद रोमांचक रहे इस मुकाबले में भारत ने 1 विकेट से जीत दर्ज़ की. मैच में आठ विकेट लेने वाले ज़हीर खान को 'मैन ऑफ़ द मैच' चुना गया.

दूसरा टेस्ट: 9 से 13 अक्टूबर, चिन्नास्वामी स्टेडियम, बेंगलुरु.
पहले मैच की तरह इस बार भी टॉस जीत पहले बल्लेबाजी करने उतरी कंगारू टीम ने 478 रन बनाए. 17 चौकों की मदद से ऑस्ट्रेलियाई टीम की ओर से मार्कस नॉर्थ ने शानदार 128 रन बनाए. कंगारुओं की पहली पारी के जवाब में भारतीय टीम 17 रनों की मामूली बढ़त ले 495 रनों पर सिमट गयी. भारत की ओर से इस पारी में क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने दुहरा शतक जड़ते हुए शानदार 214 रन बनाए. सचिन के साथ ही युवा ओपनर मुरली विजय ने भी बढ़िया बल्लेबाजी करते हुए 139 रन बनाए. पहले टेस्ट में हार के बाद सीरीज़ में पिछड़ चुकी ऑस्ट्रेलियाई टीम दूसरी पारी में सिर्फ 223 रनों पर सिमट गयी. इस पारी में केवल कप्तान रिकी पॉन्टिंग ने 72 रनों का उल्लेखनीय योगदान दिया. कप्तान पॉन्टिंग के अलावा कोई भी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ ज्यादा देर क्रीज़ पर टिक न पाया. 207 रनों का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने ये लक्ष्य मात्र 3 विकेट खोकर हासिल कर लिया. भारत की ओर से अपना पहला टेस्ट खेल रहे चेतेश्वर पुजारा ने 72 रन बनाकर सभी को प्रभावित किया. दूसरी पारी में भी बढिया बल्लेबाजी करते हुए सचिन ने अपने टेस्ट करियर का 58वां अर्धशतक ठोंका और 'मैन ऑफ़ द मैच' का खिताब अपने नाम किया.
अंततः भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया हो 2 -0 से सीरीज़ हरा 'बार्डर-गावस्कर' ट्राफी पर कब्जा किया. पूरी सीरीज़ में ज़बरदस्त प्रदर्शन करने वाले सचिन तेंदुलकर को 'मैन ऑफ़ द सीरीज़' घोषित किया गया. इसके साथ ही एक लम्बे अरसे बाद सचिन आई.सी.सी. के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों की सूची में पहले पायदान पर पहुँच गए. टेस्ट टीमों की रैंकिंग में भी भारत शीर्ष पर बना हुआ है.

टेस्ट सीरीज़ में मिली हार का बदला वनडे में चुकाने का कंगारुओं का सपना धरा ही रह गया. तीन मैचों की वनडे श्रंखला के पहले और आखिरी मैच बारिश की भेंट चढ़ गए जिनका कोई नतीजा न निकल सका. वहीँ दूसरी ओर विशाखापत्तनम में खेले गए दूसरे वनडे में भारत ने पांच विकेट से जीत दर्ज़ की. इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए कप्तान माइकल क्लार्क के 111 रनों की मदद से ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 289 रन बनाए. ऑस्ट्रेलिया की ओर से वाईट और हसी ने क्रमश 89 व 69 रनों का योगदान दिया. 290 के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया ने यह लक्ष्य सिर्फ 48 .5 ओवरों में पांच विकेट शेष रहते हासिल कर लिया. रणजी में दिल्ली और आई.पी.एल.में बंगलुरु की ओर से खेलने वाले विराट कोहली ने भारत के लिए 118 रन बनाए. युवराज सिंह(58 रन, पांच चौके) और सुरेश रैना(71 रन, नौ चौके) ने भी भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई. विराट कोहली को अपनी शतकीय पारी के 'मैन ऑफ़ द मैच' के ख़िताब से नवाज़ा गया.
ऑस्ट्रेलियाई टीम को भारत का यह दौरा आसानी से भूलेगा नही. पहले भारतीय टीम का शानदार प्रदर्शन और बाद में बारिश ने कंगारुओं को जीत से वंचित रखा. अगर बात भारतीय टीम की करी जाए तो 2011 विश्वकप की तैय्यारियों का भारतीय टीम ने एक उत्कृष्ट नमूना पेश किया. लम्बे समय से खराब फार्म से जूझ रहे युवराज सिंह जहाँ रंग में लौटते दिखे, वहीँ पिछले कई अरसे से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे सुरेश रैना सभी की आँखों के नूर बन चुके हैं. हम कह सकते हैं 2011 विश्वकप के मद्देनजर, एक बेहतरीन टीम तैयार हो रही है.

- देवास दीक्षित कृत

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